नवी मुंबई। Belapur Hills में बुधवार रात भीषण जंगल की आग लगने से इलाके में हड़कंप मच गया। पहाड़ियों पर उठती आग की ऊंची लपटें दूर-दूर तक दिखाई दीं, जिससे आसपास के रहवासियों में दहशत का माहौल बन गया। आग काल्पतरु और विकासिनी को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी के पीछे की पहाड़ियों पर फैलती हुई देखी गई।
स्थानीय लोगों ने बताया कि बेलापुर के पहाड़ियों पर आग लगने की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं, लेकिन वन विभाग को की गई शिकायतों पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।पर्यावरण कार्यकर्ताओं का आरोप है कि बार-बार लगने वाली आग के पीछे जमीन खाली कराने या अवैध उपयोग की कोशिश हो सकती है। इस मामले में अब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis se उच्चस्तरीय जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की जाने लगी है। इस तरह के घटनाओं से पहाड़ी का पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र गंभीर खतरे में है, इसलिए यह स्पष्ट होना जरूरी है कि आग दुर्घटनावश लगी या जानबूझकर लगाई गई।पिछले एक दशक से बेलापुर हिल्स कथित जमीन कब्जे, हरित क्षेत्र की कटाई और करीब 2.3 लाख वर्ग फुट में फैले अवैध धार्मिक ढांचों को लेकर विवादों में रही हैं। “सेव बेलापुर हिल्स फोरम” के सदस्य कृष्णन पोट्टी के अनुसार कई ढांचों का दायरा समय के साथ बढ़ता गया है और विस्तार अब भी जारी है।
महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग में हुई सुनवाई के दौरान वन विभाग ने बताया था कि इन पहाड़ियों का प्रबंधन CIDCO को सौंपा गया है। ऐसे में कार्यकर्ताओं का कहना है कि अतिक्रमण रोकने और बार-बार लगने वाली आग की जांच की जिम्मेदारी अब CIDCO की है। सामाजिक कार्यकर्ता मधु शंकर के मुताबिक इस तरह की आग से न केवल हरित आवरण नष्ट होता है बल्कि पहाड़ियों में रहने वाले जानवरों और पक्षियों के प्राकृतिक आवास पर भी गंभीर खतरा मंडराता है।
