प्रदर्शन के दौरान नागरिकों ने सड़क किनारे हाथों में हाथ डालकर लंबी मानव शृंखला बनाई और “No Trees, No Future”, “Ped Jiyenge Toh Hum Jiyenge” तथा “Relocation? I am Not a Sofa” जैसे संदेशों वाले पोस्टर प्रदर्शित किए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पेड़ों का प्रत्यारोपण स्थायी समाधान नहीं है और इससे शहर के पर्यावरण संतुलन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
एलिवेटेड कॉरिडोर का वैकल्पिक प्रस्ताव
आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने अंडरपास के बजाय एलिवेटेड कॉरिडोर (ऊपरी मार्ग) का विकल्प सुझाया है।श्रीकांत पाटकी, संयोजक, Palm Beach Greens Forum ने बताया कि विशेषज्ञों के साथ मिलकर एक विस्तृत वैकल्पिक प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इस प्रस्ताव के अनुसार वाशी और सानपाड़ा के बीच ट्रांस-हार्बर रेलवे ट्रैक पर मौजूदा रोड-ओवर-ब्रिज (ROB) का विस्तार कर एलिवेटेड कॉरिडोर विकसित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि यह एलिवेटेड मार्ग सानपाड़ा स्थित मोराज ट्रैफिक आइलैंड तक बढ़ाया जा सकता है और इसे मौजूदा ROB से जोड़ा जा सकता है। इससे न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि हरित आवरण को भी संरक्षित रखा जा सकेगा। यह प्रस्ताव शीघ्र ही महाराष्ट्र के वन मंत्री गणेश नाईक को सौंपे जाने की जानकारी दी गई है।
“विकास चाहिए, लेकिन हरियाली की कीमत पर नहीं”
इस प्रदर्शन में Save Belapur Hills, Human Chain Online, Jyesth Nagrik Sanstha और Parsik Greens सहित कई नागरिक संगठन शामिल हुए।
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन परिपक्व पेड़ों की कटाई स्वीकार्य नहीं है। उनका कहना है कि एक पेड़ को पूर्ण विकसित होने और पर्याप्त ऑक्सीजन प्रदान करने में 10 से 12 वर्ष लगते हैं। ऐसे में नए पौधे लगाकर स्थापित पेड़ों की भरपाई नहीं की जा सकती।
पर्यावरणविदों ने यह भी रेखांकित किया कि बढ़ते प्रदूषण और तापमान के बीच नवी मुंबई के “ग्रीन लंग्स” को बचाना अत्यंत आवश्यक है। उनका तर्क है कि शहर पहले ही प्रति व्यक्ति हरित क्षेत्र के मानकों से पीछे है, ऐसे में 440 पेड़ों की कटाई भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय संकट को जन्म दे सकती है।
प्रशासन के सामने चुनौती
अब यह मामला प्रशासन और नागरिकों के बीच संवाद का विषय बन गया है। एक ओर यातायात सुधार की आवश्यकता है, तो दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।नागरिकों की मांग है कि किसी भी परियोजना को अंतिम रूप देने से पहले उसका विस्तृत पर्यावरणीय प्रभाव आकलन किया जाए और वैकल्पिक योजनाओं पर गंभीरता से विचार किया जाए।स्पष्ट है कि यह आंदोलन केवल 440 पेड़ों तक सीमित नहीं, बल्कि शहर के भविष्य और पर्यावरणीय संतुलन से जुड़ा मुद्दा बन चुका है।
