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“पनवेल महानगरपालिका किसी की जागीर नहीं” — सत्ताधारियों पर बरसे कांतीलाल कडू, 15 दिन का अल्टीमेटम

“पनवेल महानगरपालिका किसी की जागीर नहीं” — सत्ताधारियों पर बरसे कांतीलाल कडू, 15 दिन का अल्टीमेटम

पनवेल: पनवेल महानगरपालिका के अस्तित्व को ही कमतर आंकते हुए सत्ता के बल पर मनमानी किए जाने के गंभीर आरोपों के साथ लोकमुद्रा जनहित पार्टी के अध्यक्ष कांतीलाल कडू ने सत्ताधारियों के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। कडू ने साफ शब्दों में कहा कि महानगरपालिका किसी व्यक्ति या समूह की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि जनता की संस्था है, और इसे “दासी” की तरह चलाने वालों से जवाब जरूर लिया जाएगा। उन्होंने ‘सेव पनवेल महानगरपालिका’ का नारा देते हुए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को सीधी चेतावनी दी है।

कडू ने महापौर नितीन पाटील और आयुक्त मंगेश चितळे से मुलाकात कर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि महानगरपालिका की जमीनों पर सामाजिक संस्थाओं के नाम पर प्रकल्प खड़े किए जा रहे हैं, लेकिन वहां से महानगरपालिका का नाम ही गायब कर दिया गया है। इस मुद्दे पर कडू के तेवरों से शहर का राजनीतिक माहौल गरमा गया है और अब सबकी नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है।

महापालिका की जमीनों पर ‘कब्जे’ का आरोप

उरण नाका और तक्का इलाके में महानगरपालिका की जमीन पर बने ट्रैफिक आयलैंड और पुतलों पर सत्ताधारी नेताओं से जुड़ी संस्थाओं के नाम प्रमुखता से लगाए जाने का आरोप कडू ने लगाया। उन्होंने कहा कि जहां महानगरपालिका का नाम बड़े अक्षरों में होना चाहिए, वहां उसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है।

कडू ने सीधे तौर पर संबंधित संस्थाओं और नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सार्वजनिक संपत्ति पर निजी कब्जे की मानसिकता को दर्शाता है।

बस स्टॉप को विधायक के नाम पर रखने पर सवाल

ठाणा नाका स्थित बस स्टॉप को बिना किसी आधिकारिक प्रस्ताव के विधायक के नाम पर रखे जाने पर भी कडू ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे लोकतंत्र का मजाक बताते हुए कहा कि यदि यह निर्णय तुरंत वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन किया जाएगा। साथ ही वहां बनाए गए अवैध शेड को हटाने की भी मांग की गई।

“कोशिश फाउंडेशन का योगदान क्या?”

कडू ने सवाल उठाया कि जिन संस्थाओं को प्रकल्प दिए जा रहे हैं, उनका वास्तविक सामाजिक योगदान क्या है? उन्होंने मांग की कि महानगरपालिका की वेबसाइट पर इन संस्थाओं की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि नागरिकों को पारदर्शिता दिखाई दे। अन्यथा पूरे मामले पर संदेह बना रहेगा।

15 दिन का अल्टीमेटम, वरना आमरण अनशन

कडू ने प्रशासन को 15 दिनों का समय देते हुए कहा कि सभी स्थानों पर तुरंत महानगरपालिका के नाम के बोर्ड लगाए जाएं। यदि ऐसा नहीं हुआ तो भ्रष्टाचार निरोधक विभाग से जांच की मांग की जाएगी और आमरण अनशन भी शुरू किया जाएगा।

नाट्य प्रतियोगिता पर भी उठे सवाल

स्वीकृत नगरसेवक द्वारा बिना किसी प्रस्ताव के नाट्य प्रतियोगिता घोषित करने पर कडू ने इसे “राजनीतिक स्टंट” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों से सत्ता का दुरुपयोग कर नियमों को दरकिनार किया जा रहा है और प्रशासन भी इसमें सहयोग कर रहा है।

शहर के विद्रूपीकरण पर प्रशासन घिरा

पनवेल शहर में बढ़ते अतिक्रमण और अव्यवस्था पर भी कडू ने प्रशासन को घेरा। उन्होंने कहा कि शहर की सुंदरता बिगाड़ने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े होते हैं।

दि. बा. पाटील के नाम की मांग

कडू ने महानगरपालिका के नए प्रशासनिक भवन को ‘लोकनेते दि. बा. पाटील प्रशासनिक भवन’ नाम देने की मांग दोहराई और कहा कि पुराने प्रस्ताव को रद्द कर नया प्रस्ताव पारित किया जाए।

“महानगरपालिका जनता की है”

अंत में कडू ने दो टूक कहा, “पनवेल महानगरपालिका किसी की बाप-दादाओं की नहीं है। यह जनता की संस्था है और इसका अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सत्ता आपकी हो सकती है, लेकिन कानून और न्याय व्यवस्था जनता के साथ है।”


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