मुंबई।
मुंबई में राजनीतिक बयानबाज़ी को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। शिवसेना के विधायक Sanjay Gaikwad के कथित विवादित और आपत्तिजनक बयान पर महाराष्ट्र कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। Harshvardhan Sapkal ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूछा है कि आखिर ऐसे बयानों पर कार्रवाई करने से सरकार क्यों बच रही है।
मुंबई के गांधी भवन में मीडिया से बात करते हुए सपकाळ ने कहा कि विधायक गायकवाड की भाषा न सिर्फ अशोभनीय है, बल्कि उसमें आपराधिक प्रवृत्ति भी झलकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि गायकवाड ने ‘शिवाजी कौन था?’ नामक पुस्तक के प्रकाशक प्रशांत आंबी के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
सपकाळ ने यह भी दावा किया कि गायकवाड का विवादों से पुराना नाता रहा है और उन पर पहले भी कई गंभीर आरोप लग चुके हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे जनप्रतिनिधि का व्यवहार न केवल समाज में गलत संदेश देता है, बल्कि कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार, जिसकी अगुवाई Devendra Fadnavis कर रहे हैं, इस मामले में चुप्पी साधे हुए है और कठोर कार्रवाई करने से बच रही है।
विवाद यहीं नहीं थमा। सपकाळ ने कहा कि गायकवाड ने अपने बयान में समाज सुधारक Govind Pansare की हत्या का भी जिक्र किया, जो बेहद संवेदनशील मुद्दा है। उन्होंने इस पर भी सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाया।
इसके साथ ही कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राज्य में ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के सम्मान को लेकर दोहरा रवैया अपनाया जा रहा है। सपकाळ ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम और इतिहास को लेकर बार-बार विवाद खड़े किए जाते हैं, लेकिन सरकार ठोस कदम उठाने से बचती है।
भाषा के मुद्दे पर भी सपकाळ ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा का संरक्षण जरूरी है, लेकिन इसे जबरन लागू करना सही तरीका नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य के सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में मराठी भाषा के स्वतंत्र विभाग स्थापित किए जाएं, ताकि भाषा का विकास स्वाभाविक रूप से हो सके।
इस पूरे विवाद ने महाराष्ट्र की राजनीति को फिर गर्मा दिया है। जहां एक तरफ विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर सत्ताधारी दल की ओर से अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।
