पनवेल। देशभर में 80वां स्वतंत्रता दिवस पूरे उत्साह और देशभक्ति के साथ मनाया गया। सरकारी और निजी संस्थानों में तिरंगा फहराकर राष्ट्रीय पर्व मनाया गया। इसी बीच पनवेल तालुका की एक निजी स्कूल से जुड़े बताए जा रहे एक कथित फोटो को लेकर राष्ट्रध्वज के सम्मान पर सवाल उठने लगे हैं।
सोशल मीडिया पर प्रसारित इस फोटो को लेकर दावा किया जा रहा है कि एक व्यक्ति कुर्सी पर बैठा हुआ है और उसके पीछे राष्ट्रध्वज रखा दिखाई दे रहा है। फोटो सामने आने के बाद कुछ नागरिकों ने इसे राष्ट्रध्वज के अपमान की आशंका बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
बताया जा रहा है कि संबंधित निजी स्कूल का संबंध भाजपा ओबीसी मोर्चा के नेता एकनाथ देशेकर से है। दावा यह भी किया जा रहा है कि उक्त फोटो सोशल मीडिया स्टेटस पर साझा किया गया था। हालांकि, फोटो की वास्तविकता, उसका समय और स्थान तथा उसमें दिखाई दे रही परिस्थितियों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।
एकनाथ देशेकर ने दी सफाई
मामले पर एकनाथ देशेकर ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं कुछ नहीं किया है। उनके अनुसार, फोटो में दिखाई दे रहा व्यक्ति उनका कर्मचारी है और वह राष्ट्रध्वज पर नहीं, बल्कि कुर्सी पर बैठा था। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रध्वज कुर्सी के पीछे था और फोटो किसी बच्चे द्वारा स्टेटस पर लगाया गया था।
इस स्पष्टीकरण के बाद भी नागरिकों का कहना है कि पूरे मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि राष्ट्रध्वज के साथ किसी प्रकार का अनादर हुआ था या नहीं।
कानून में क्या है प्रावधान?
भारत में राष्ट्रध्वज के उपयोग और प्रदर्शन के संबंध में फ्लैग कोड ऑफ इंडिया, 2002 और Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 में प्रावधान किए गए हैं। सार्वजनिक रूप से राष्ट्रध्वज का जानबूझकर अपमान या अनादर किए जाने की स्थिति में कानून के तहत कार्रवाई का प्रावधान है।
हालांकि, केवल किसी फोटो के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। मामले में फोटो की प्रामाणिकता, पूरी परिस्थिति और संबंधित व्यक्ति की मंशा की जांच आवश्यक है।
अब प्रशासन की जांच पर नजर
नागरिकों की मांग है कि पुलिस और संबंधित प्रशासन वायरल फोटो की सत्यता की जांच करे। फोटो कब और कहां लिया गया, उसे किसने साझा किया, राष्ट्रध्वज की वास्तविक स्थिति क्या थी और क्या जानबूझकर उसका अपमान किया गया—इन सभी पहलुओं की जांच की जानी चाहिए।
यदि जांच में राष्ट्रध्वज के अपमान की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो प्रशासन द्वारा वास्तविक तथ्य भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
राष्ट्रध्वज देश की स्वतंत्रता, संप्रभुता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। ऐसे में मामला किसी राजनीतिक व्यक्ति, संस्था या आम नागरिक से जुड़ा हो, कानून सभी के लिए समान होना चाहिए। अब देखना होगा कि पनवेल पुलिस और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।
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