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तुर्भे में सामासिक जमीन पर अवैध कारोबार का जाल! मनपा को लाखों के राजस्व का नुकसान, फुटपाथ भी कब्जे में

तुर्भे में सामासिक जमीन पर अवैध कारोबार का जाल! मनपा को लाखों के राजस्व का नुकसान, फुटपाथ भी कब्जे में

नवी मुंबई: तुर्भे स्थित एपीएमसी (कृषि उत्पन्न बाजार समिति) क्षेत्र में सामासिक (मार्जिनल) जगहों का बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उपयोग किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ दुकानदार नगर निगम के नियमों की अनदेखी कर इन जगहों पर पक्के बरसाती शेड लगाकर खुलेआम व्यापार कर रहे हैं, जिससे नवी मुंबई महानगरपालिका (मनपा) को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
सूत्रों के अनुसार, कई दुकानदारों से पावसाळी शेड की निर्धारित फीस ही नहीं ली गई, जबकि कुछ मामलों में वास्तविक उपयोग से कम क्षेत्र का शुल्क वसूला गया। ऐसे में राजस्व हानि के साथ-साथ नियमों के उल्लंघन के गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
तुर्भे विभाग कार्यालय के अंतर्गत आने वाला एपीएमसी परिसर एशिया के सबसे बड़े कृषि बाजारों में से एक माना जाता है। यहां फल, सब्जी, अनाज, मसाला और अन्य बाजारों सहित पांच प्रमुख मार्केट संचालित होते हैं, जहां प्रतिदिन हजारों व्यापारी और ग्राहक आते-जाते हैं। इसी परिसर में माथाडी भवन और अन्य स्थानों पर कई थोक व खुदरा दुकानें भी संचालित हैं।
नियमों के अनुसार, दुकानों के सामने बनी सामासिक (मार्जिनल) जगह पर लगाया गया बरसाती शेड केवल बारिश से सुरक्षा के लिए होता है। इसके नीचे किसी भी प्रकार का व्यापार या सामान रखकर बिक्री करना प्रतिबंधित है। लेकिन हकीकत में 100 से अधिक दुकानदार इन शेडों के नीचे सामान रखकर खुलेआम बिक्री कर रहे हैं और हर महीने लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं।
इतना ही नहीं, कुछ किराना और स्टेशनरी दुकानदारों ने अपनी दुकान के सामने की सामासिक जगह फरसाण और अन्य खाद्य सामग्री बेचने वालों को किराये पर दे रखी है। इससे वे अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं। आरोप है कि अतिक्रमण विभाग को इस पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब कई दुकानदार सामासिक जगह से आगे बढ़कर फुटपाथ तक पर सामान फैला देते हैं। इससे पैदल चलने वालों का रास्ता पूरी तरह बाधित हो जाता है। त्योहारों के दौरान ग्राहकों की भीड़ बढ़ने पर लोगों को मजबूरन सड़क पर चलना पड़ता है, जिससे दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है।
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि यदि मनपा निष्पक्ष जांच कर वास्तविक उपयोग के आधार पर शुल्क वसूले और अवैध अतिक्रमण हटाए, तो न केवल पालिका का राजस्व बढ़ेगा बल्कि आम नागरिकों को भी राहत मिलेगी। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस मामले में कब और क्या कार्रवाई करता है।


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