वाशी: ‘स्वबोध’ और ‘शत्रुबोध’ को जागृत रखते हुए राष्ट्र और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए संगठित होना जरूरी है, ऐसा प्रतिपादन हिंदू जनजागृति समिति के प्रवक्ता डॉ. उदय धुरी ने कोपरखैरणे में किया। वे सनातन संस्था की ओर से आयोजित गुरुपूर्णिमा महोत्सव में बोल रहे थे। कोपरखैरणे सहित देशभर में इस वर्ष संस्था की ओर से मराठी, हिंदी, गुजराती, कन्नड़, अंग्रेजी, तेलुगु और मलयालम सहित विभिन्न भाषाओं में कुल 81 स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए।
डॉ. धुरी ने आगे कहा कि आज देश और धर्म पर होने वाले हमले केवल सीमा तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि वे सीधे हमारे घर की चौखट तक पहुंच चुके हैं। आतंकवाद और घुसपैठ के साथ ही ‘लव जिहाद’, ‘लैंड जिहाद’ और ‘कॉरपोरेट जिहाद’ जैसे विभिन्न आघात और षड्यंत्रों के माध्यम से हमें व्यवस्थित रूप से निशाना बनाया जा रहा है। इसके जरिए देश के भूराजनीतिक नक्शे और जनसंख्या के समीकरण को बदलने की साजिश रची जा रही है।
उन्होंने कहा कि जब तक समाज में ‘स्वबोध’ और ‘शत्रुबोध’ यानी दुश्मन की छिपी रणनीतियों के प्रति जागरूकता पैदा नहीं होगी, तब तक इन चौतरफा चुनौतियों का मुकाबला करना संभव नहीं है। इसलिए अब केवल मूकदर्शक बने रहने के बजाय देश और धर्म की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक के कार्याध्यक्ष रणजीत सावरकर ने कहा कि हिंदुओं के एकीकरण की प्रक्रिया समय की आवश्यकता है। जनसंख्या नियंत्रण और धर्मांतरण विरोधी कानून को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।
गुरुपूर्णिमा महोत्सव की शुरुआत श्री व्यास पूजन और परम पूज्य भक्तराज महाराज के प्रतिमा पूजन (गुरुपूजन) से हुई। इसके बाद सनातन संस्था और संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले के कार्य पर आधारित लघु फिल्म दिखाई गई। सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले का संदेश पढ़कर सुनाया गया। इस दौरान धर्मरक्षक और हिंदुत्वनिष्ठों का सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में आत्मरक्षा की आसान तकनीकों का प्रदर्शन, रामराज्य की स्थापना के लिए संकल्प और भावपूर्ण नामजप भी किया गया। आगामी वैश्विक युद्ध और आपातकाल की संभावनाओं को देखते हुए संस्था की ओर से नागरिकों से प्राथमिक उपचार, अग्निशमन और आत्मरक्षा का प्रशिक्षण लेने का आह्वान भी किया गया।
