नवी मुंबई। मछली खाते समय गले में फंसा एक छोटा-सा कांटा भी जानलेवा साबित हो सकता है। अक्सर लोग इसे मामूली समस्या समझकर घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं, लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर यह गंभीर संक्रमण, सांस लेने में रुकावट और यहां तक कि जान का खतरा भी पैदा कर सकता है। ऐसा ही एक मामला नवी मुंबई के मेडिकवर अस्पताल में सामने आया, जहां डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने दो अलग-अलग मरीजों की जटिल सर्जरी कर उनकी जान बचाई।
पहला मामला खोपोली की 53 वर्षीय गृहिणी का है। मछली खाते समय उनके गले में कांटा फंस गया था। शुरुआत में उन्हें केवल गले में दर्द और भोजन निगलने में परेशानी हुई, लेकिन कुछ ही दिनों में स्थिति बिगड़ती गई और सांस लेने में भी कठिनाई होने लगी। जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि कांटा गले से निकलकर गर्दन के अंदर एडम्स एप्पल के ऊपर नरम ऊतकों में गहराई तक पहुंच गया था। वहां संक्रमण फैलने से फोड़ा बन चुका था।
मामला तब और गंभीर हो गया जब जांच में यह भी सामने आया कि महिला को NSTEMI (हार्ट अटैक) आया था और हृदय की कई धमनियों में रुकावट थी। ऐसे में मरीज की जान बचाने के लिए ईएनटी, कार्डियोलॉजी, रेडियोलॉजी और एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की संयुक्त टीम बनाई गई।
मेडिकवर अस्पताल के ईएनटी एवं एंडोस्कोपिक सर्जन डॉ. राजेंद्र वाघेला ने बताया कि अल्ट्रासाउंड तकनीक की सहायता से कांटे की सटीक स्थिति का पता लगाया गया और करीब एक घंटे चली जटिल सर्जरी के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। ऑपरेशन सफल रहा और मरीज की स्थिति स्थिर होने के बाद कार्डियोलॉजी टीम ने चरणबद्ध तरीके से एंजियोप्लास्टी भी की।
दूसरा मामला पनवेल के 60 वर्षीय शिक्षक का था। मछली का कांटा गले में फंसने के बाद उन्होंने घरेलू उपाय अपनाए, लेकिन दर्द और परेशानी कम नहीं हुई। बाद में सीटी स्कैन में पता चला कि कांटा गर्दन के अंदर गहराई तक फंसा हुआ है। डॉक्टरों ने जनरल एनेस्थीसिया देकर अल्ट्रासाउंड की मदद से सफल सर्जरी की और कांटा सुरक्षित निकाल दिया। इलाज के बाद दोनों मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर अस्पताल से घर लौट गए।
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. तमीरुद्दीन दानावड़े ने बताया कि यदि महिला मरीज को समय पर अस्पताल नहीं लाया जाता तो संक्रमण बढ़ने के साथ-साथ सांस की नली बंद होने जैसी जानलेवा स्थिति बन सकती थी। उन्होंने कहा कि समय पर विशेषज्ञ उपचार मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकी।
डॉ. राजेंद्र वाघेला ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि यदि मछली का कांटा गले में फंस जाए तो केला, सूखे चावल, ब्रेड, सोडा या सिरका जैसे घरेलू नुस्खों पर भरोसा न करें। इसी तरह उंगली, चिमटी या किसी अन्य वस्तु से कांटा निकालने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे गले में गंभीर चोट, संक्रमण या अंदरूनी रक्तस्राव हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से संपर्क करना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।
मेडिकवर अस्पताल के महाराष्ट्र एवं कर्नाटक रीजन के रीजनल डायरेक्टर नीरज लाल ने कहा कि मछली का छोटा-सा कांटा भी मेडिकल इमरजेंसी का रूप ले सकता है। वहीं, सेंटर हेड संदीप जोशी ने दोनों मरीजों के सफल इलाज का श्रेय अस्पताल की विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम, आधुनिक चिकित्सा तकनीक और समय पर किए गए समन्वित उपचार को दिया।
यह मामला इस बात का उदाहरण है कि सामान्य दिखने वाली स्वास्थ्य समस्या को भी नजरअंदाज करना कितना खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर सही जांच और उपचार से ऐसी जटिल परिस्थितियों में भी मरीज की जान बचाई जा सकती है।
