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पनवेल में करोड़ों की संपत्ति के विवाद में दो बिल्डर गिरफ्तार, डॉ. बिरमिळे से धोखाधड़ी का आरोप

पनवेल में करोड़ों की संपत्ति के विवाद में दो बिल्डर गिरफ्तार, डॉ. बिरमिळे से धोखाधड़ी का आरोप

नवी मुंबई। पनवेल में करोड़ों रुपये की संपत्ति से जुड़े विवाद में कथित धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोप में पनवेल शहर पुलिस ने दो बिल्डरों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अविनाश दगडू जगदाळे (32) और मनोज जयसिंह डोंगरे (37) के रूप में हुई है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने डॉ. भगवान जयवंत बिरमिळे के कथित फर्जी हस्ताक्षरों वाले दस्तावेज तैयार कर उन्हें न्यायालय में असली बताकर पेश किया। गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला पनवेल के पुष्पकनगर, सेक्टर-2 स्थित भूखंड क्रमांक 456 से जुड़ा है। बताया जाता है कि डॉ. बिरमिळे और उनके व्यावसायिक साझेदार अविनाश जगदाळे तथा मनोज डोंगरे ने मिलकर किसानों से इस भूखंड को विकसित करने के उद्देश्य से लिया था। शुरुआत में तीनों के बीच व्यावसायिक साझेदारी थी, लेकिन बाद में आपसी मतभेद बढ़ने के कारण संपत्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया। मामला पनवेल के न्यायालय तक पहुंच गया और संबंधित संपत्ति के अधिकारों को लेकर विशेष दीवानी दावा क्रमांक 208/2026 लंबित है।

डॉ. बिरमिळे की शिकायत के अनुसार, विवादित संपत्ति पर उनके अधिकार समाप्त हो चुके हैं, ऐसा दर्शाने के उद्देश्य से कथित तौर पर फर्जी अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) और घोषणा पत्र तैयार किए गए। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इन दस्तावेजों पर डॉ. बिरमिळे के जाली हस्ताक्षर किए गए और दस्तावेजों को वास्तविक बताकर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस कथित कृत्य के जरिए संपत्ति पर उनके कानूनी अधिकारों को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।

मामले की प्राथमिक जांच के बाद परिमंडल-3, पनवेल के पुलिस उपायुक्त कार्यालय से अनुमति लेकर पनवेल शहर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धाराओं 318(4), 336(3), 338, 340(2) और 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया गया है। ये धाराएं धोखाधड़ी, कथित जालसाजी, महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों को असली के रूप में इस्तेमाल करने और साझा उद्देश्य से किए गए कृत्यों से संबंधित हैं।

इस मामले की जांच वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक बाळा कुंभार के मार्गदर्शन में सहायक पुलिस निरीक्षक सचिन पोवार कर रहे हैं। पुलिस अब कथित फर्जी दस्तावेजों की उत्पत्ति, उन पर किए गए हस्ताक्षरों की सत्यता, दस्तावेज तैयार करने वालों और उन्हें न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया की जांच कर रही है। साथ ही, यह भी पता लगाया जाएगा कि इस कथित प्रकरण में अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या विवादित NOC और घोषणा पत्र वास्तव में जाली हैं और क्या उनका इस्तेमाल डॉ. बिरमिळे के संपत्ति संबंधी अधिकारों को प्रभावित करने के लिए किया गया। पुलिस जांच में दस्तावेजों की सत्यता और पूरे लेन-देन से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जाएगी।

फिलहाल, दोनों आरोपियों को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजे जाने के बाद जांच जारी है। संपत्ति के अधिकारों से संबंधित दीवानी मामला भी न्यायालय में लंबित है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी न्यायालय में सिद्ध नहीं हुए हैं और उनकी ओर से पक्ष उपलब्ध नहीं हुआ है। मामले में अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच, प्रस्तुत सबूतों और न्यायालय के फैसले पर निर्भर करेगा।



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