नवी मुंबई। खारघर स्थित मेडिकवर अस्पताल के डॉक्टरों ने 57 वर्षीय महिला की छाती में हृदय के पीछे मौजूद 18 सेंटीमीटर की विशाल थायरॉइड गांठ को जटिल सर्जरी के जरिए सफलतापूर्वक निकाल दिया। करीब 10 घंटे तक चले इस ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत में सुधार हुआ और सात दिन बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
अलीबाग निवासी दहिता जैतू पिछले दो वर्षों से चलते समय सांस फूलने और कमजोरी की समस्या से परेशान थीं। कई डॉक्टरों से परामर्श लेने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद एक स्थानीय डॉक्टर की सलाह पर उन्होंने खारघर के मेडिकवर अस्पताल में उपचार कराया।
अस्पताल में जांच और सीटी स्कैन के दौरान छाती के भीतर हृदय के पीछे एक विशाल गांठ होने का पता चला। डॉक्टरों के अनुसार, यह गांठ थायरॉइड ग्रंथि से संबंधित अतिरिक्त ऊतकों से बनी थी। चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को ‘थायरोथायमिक थायरॉइड रेस्ट’ कहा जाता है।
प्रमुख रक्तवाहिनियों के पास होने से चुनौतीपूर्ण थी सर्जरी
गांठ हृदय, श्वासनली और प्रमुख रक्तवाहिनियों के बेहद करीब स्थित थी। इसका आकार और स्थान देखते हुए केवल गर्दन के रास्ते इसे निकालना सुरक्षित नहीं था। सर्जरी के दौरान महत्वपूर्ण अंगों और रक्तवाहिनियों को नुकसान पहुंचने का खतरा था।
अस्पताल के कैंसर सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. राहुलकुमार एन. चव्हाण के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने गर्दन पर चीरा लगाने के साथ छाती के बीच की हड्डी खोलकर गांठ तक पहुंच बनाई। इसके बाद आसपास के महत्वपूर्ण ऊतकों और रक्तवाहिनियों को सुरक्षित रखते हुए गांठ को सावधानीपूर्वक पूरी तरह निकाल दिया गया।
इस ऑपरेशन में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. विदिशा, नर्स संदीप दिसले, गहन चिकित्सा विभाग की टीम और ऑपरेशन थिएटर के कर्मचारियों ने सहयोग किया।
सात दिन बाद अस्पताल से मिली छुट्टी
अस्पताल के अनुसार, सर्जरी के बाद मरीज में रक्त में कैल्शियम की कमी, आवाज से संबंधित नसों को नुकसान या छाती से जुड़ी अन्य प्रमुख जटिलताएं नहीं पाई गईं। स्वास्थ्य में सुधार होने पर सात दिन बाद उन्हें घर भेज दिया गया।
डॉ. चव्हाण ने बताया कि गांठ का असामान्य स्थान, विशाल आकार और प्रमुख रक्तवाहिनियों से निकटता इस ऑपरेशन को चुनौतीपूर्ण बना रहे थे। अस्पताल के महाराष्ट्र और कर्नाटक क्षेत्रीय निदेशक नीरज लाल ने जटिल उपचार में अनुभवी डॉक्टरों, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और टीम के समन्वय को महत्वपूर्ण बताया। अस्पताल के सेंटर हेड संदीप जोशी ने भी उन्नत शल्य चिकित्सा सुविधाओं की भूमिका पर जोर दिया।
उपचार के बाद दहिता जैतू ने डॉक्टरों और अस्पताल के कर्मचारियों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। इस जटिल सर्जरी के बाद उनकी सेहत में सुधार हुआ है।
