नवी मुंबई: वाशी स्थित पालिका अस्पताल एक बार फिर विवादों में घिर गया है। इस बार मामला मृतकों के शवों की ढुलाई के नाम पर कथित कमीशनखोरी से जुड़ा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने अस्पताल प्रशासन और ठेका कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में शव ले जाने के एवज में पैसे को लेकर बहस होती दिखाई दे रही है, जिसके बाद पूरे मामले की जांच की मांग तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार मंगलवार को एक मृतक का शव वाशी के पालिका अस्पताल में लाया गया था। आरोप है कि अस्पताल से जुड़े कुछ कर्मचारियों द्वारा मृतक के परिजनों की जानकारी निजी एंबुलेंस संचालकों तक पहुंचाई जाती है, ताकि शव को अंतिम संस्कार स्थल तक पहुंचाने के बदले मिलने वाले किराये में से कमीशन हासिल किया जा सके।
बताया जा रहा है कि इस मामले में मृतक का शव निजी एंबुलेंस के बजाय पालिका की आधिकारिक शववाहिनी से ले जाया गया। इससे कथित तौर पर संबंधित वार्ड बॉय को मिलने वाला कमीशन नहीं मिल पाया। आरोप है कि इसके बाद अस्पताल में कार्यरत एक महिला कर्मचारी (मावशी) ने वार्ड बॉय को निजी एंबुलेंस संचालकों से पैसे मांगने के लिए भेजा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब वार्ड बॉय ने एंबुलेंस संचालकों से पैसे की मांग की तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें शव ढुलाई का कोई किराया नहीं मिला है। इसके बावजूद कथित रूप से 1,000 रुपये की मांग की गई। काफी बहस और विवाद के बाद एंबुलेंस संचालकों ने 600 रुपये दिए, लेकिन इसके बाद भी पैसों को लेकर कहासुनी जारी रही। इसी दौरान किसी ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
इस घटना ने अस्पताल में शवों की ढुलाई और उससे जुड़े कथित कमीशन नेटवर्क को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो यह बेहद गंभीर और अमानवीय मामला है, क्योंकि यहां मृतकों और उनके परिजनों की मजबूरी का फायदा उठाने की कोशिश की जा रही है।
मामले का एक और संवेदनशील पहलू यह है कि संबंधित वार्ड बॉय भाजपा के एक नगरसेवक के बेटे को मिले ठेके के तहत कार्यरत बताए जा रहे हैं। आरोप यह भी है कि इसी ठेकेदार से जुड़े कर्मचारियों पर पहले भी पैसे वसूली के आरोप लग चुके हैं।
गौरतलब है कि कुछ समय पहले भी इसी अस्पताल के एक वार्ड बॉय का वीडियो सामने आया था, जिसमें कथित रूप से कफन के नाम पर मृतक के परिजनों से पैसे मांगने का आरोप लगा था। उस मामले को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने अस्पताल के बाहर आंदोलन किया था और मामला पुलिस तक पहुंचा था।
अब नए वीडियो के सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल परिसर में इस तरह का कोई अवैध कमीशन तंत्र संचालित हो रहा है तो उसे तत्काल बंद किया जाना चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
फिलहाल अस्पताल प्रशासन की ओर से इस वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि मामला चर्चा में आने के बाद प्रशासन पर जांच शुरू करने और सच्चाई सामने लाने का दबाव बढ़ता जा रहा है।
