नवी मुंबई
देश के सबसे व्यस्त कंटेनर बंदरगाहों में शामिल Jawaharlal Nehru Port Authority (जेएनपीटी) इन दिनों ट्रेलर चालकों की गंभीर कमी से जूझ रहा है। इस संकट का असर अब सीधे तौर पर आयात-निर्यात गतिविधियों पर दिखाई देने लगा है। कंटेनरों की समय पर ढुलाई नहीं हो पाने से बंदरगाह की लॉजिस्टिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है, जिससे व्यापारियों, निर्यातकों और किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी मात्रा में कृषि उत्पाद जेएनपीटी के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजे जाते हैं। इनमें प्याज, अंगूर, अनार, केला और अन्य नाशवंत कृषि उत्पाद प्रमुख हैं। ट्रेलर चालकों की कमी के कारण कंटेनरों की आवाजाही धीमी पड़ गई है, जिससे निर्यात प्रक्रिया में देरी होने लगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो कृषि उत्पादों की गुणवत्ता और समयबद्ध आपूर्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
बंदरगाह परिसर की स्थिति भी इस संकट की गंभीरता को दर्शा रही है। आमतौर पर कंटेनरों से भरा रहने वाला पार्किंग प्लाजा इन दिनों लगभग खाली दिखाई दे रहा है। जहां पहले डेढ़ से दो किलोमीटर तक कंटेनरों की लंबी कतारें लगी रहती थीं, वहीं अब एक लाइन में केवल आठ से नौ कंटेनर ही खड़े नजर आ रहे हैं। यह दृश्य बंदरगाह संचालन में आई सुस्ती को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
वेटिंग पार्किंग प्लाजा में भी कंटेनरों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। बंदरगाह से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कंटेनर उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें गंतव्य तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त ट्रेलर चालक नहीं मिल रहे हैं। इससे कंटेनरों का आवागमन प्रभावित हो रहा है और पूरी सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ रहा है।
निर्यातकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में समय पर माल पहुंचाना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। देरी होने पर विदेशी खरीदारों के साथ व्यापारिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं और भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर भी असर पड़ सकता है। विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में इसका प्रभाव किसानों की आय पर पड़ने की आशंका है।
व्यापार जगत से जुड़े संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार के संबंधित विभागों से इस समस्या के समाधान के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि ट्रेलर चालकों की उपलब्धता बढ़ाने, कार्य परिस्थितियों में सुधार करने और लॉजिस्टिक क्षेत्र को आवश्यक सहयोग देने की आवश्यकता है, ताकि बंदरगाह संचालन सामान्य हो सके।
