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हलाल प्रमाणन पर फिर छिड़ी बहस: नवी मुंबई में प्रेस वार्ता के दौरान हिंदू जनजागृति समिति ने उठाए सवाल

हलाल प्रमाणन पर फिर छिड़ी बहस: नवी मुंबई में प्रेस वार्ता के दौरान हिंदू जनजागृति समिति ने उठाए सवाल

नवी मुंबई। देश में खाद्य उत्पादों और विभिन्न उपभोक्ता वस्तुओं के लिए जारी किए जाने वाले हलाल प्रमाणपत्र को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। नवी मुंबई में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में हिंदू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता रमेश शिंदे ने हलाल प्रमाणन व्यवस्था पर कई सवाल उठाते हुए इसे आर्थिक, सामाजिक और उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा विषय बताया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर व्यापक सार्वजनिक चर्चा और सरकारी स्तर पर स्पष्ट नीति की आवश्यकता है।

प्रेस वार्ता में हिंदू जनजागृति समिति, हिंदू एकता आंदोलन, महाराजा प्रतिष्ठान, मराठा तितुका मेळवावा, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) तथा अन्य संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। वक्ताओं ने हाल ही में सामने आए उस मुद्दे का उल्लेख किया जिसमें कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ ‘गोकुल’ द्वारा हलाल प्रमाणपत्र लेने की बात चर्चा में आई है।

रमेश शिंदे ने दावा किया कि खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भारत में पहले से ही भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) जैसी वैधानिक संस्था मौजूद है, जो खाद्य उत्पादों की जांच और प्रमाणन का कार्य करती है। उनका कहना था कि जब सरकारी मानकों के तहत उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है, तब अलग से धार्मिक आधार पर प्रमाणपत्र लेने की आवश्यकता पर चर्चा होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि हलाल प्रमाणन का दायरा अब केवल मांस उत्पादों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि दूध, चीनी, हर्बल उत्पाद, दवाइयों, कॉस्मेटिक्स और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं तक फैल चुका है। उनके अनुसार, इस विस्तार का आर्थिक प्रभाव और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले संभावित असर का अध्ययन किया जाना चाहिए।

प्रेस वार्ता के दौरान वक्ताओं ने यह भी मांग की कि राज्य और केंद्र सरकारें हलाल प्रमाणन से जुड़े नियमों, शुल्क संरचना और इसके आर्थिक प्रभावों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करें। उनका कहना था कि उपभोक्ताओं को यह जानने का अधिकार है कि किसी उत्पाद पर लगाए गए अतिरिक्त प्रमाणपत्रों का उद्देश्य क्या है और उससे प्राप्त होने वाली राशि का उपयोग किस प्रकार किया जाता है।

वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि हलाल प्रमाणन को लेकर देश में अलग-अलग विचार मौजूद हैं। समर्थकों के अनुसार यह एक धार्मिक आवश्यकता को पूरा करने वाला प्रमाणन तंत्र है, जबकि विरोधी पक्ष इसे आर्थिक और नीतिगत दृष्टिकोण से देखने की मांग करता है। इसी कारण यह विषय समय-समय पर सार्वजनिक और राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनता रहा है।

प्रेस वार्ता में उपस्थित संगठनों के प्रतिनिधियों ने सरकार से इस विषय पर विस्तृत जांच, पारदर्शिता और जनजागरूकता अभियान चलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं, किसानों और उद्योग जगत के हितों को ध्यान में रखते हुए किसी भी निर्णय पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए।


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