नवी मुंबई।
बदलती जीवनशैली, बढ़ते संक्रमण और उम्र के साथ कमजोर होती प्रतिरक्षा प्रणाली को देखते हुए नवी मुंबई के खारघर स्थित Medicover Hospitals ने वयस्कों के लिए एक विशेष एडल्ट वैक्सीनेशन क्लिनिक की शुरुआत की है। यह पहल उन लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है जो बढ़ती उम्र, मधुमेह, सांस संबंधी बीमारियों या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण संक्रमण के अधिक जोखिम में हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में अब भी अधिकांश लोग यह समझते हैं कि टीकाकरण केवल बच्चों के लिए आवश्यक होता है, जबकि वास्तविकता यह है कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती जाती है और कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए शुरू किए गए इस क्लिनिक में वयस्कों के लिए आवश्यक विभिन्न टीकों की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
क्लिनिक के उद्घाटन अवसर पर वरिष्ठ चिकित्सक और डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. बादल शिवनारायण ताओरी, डॉ. श्रीराम नावडे, डॉ. विजेता बागड़े, डॉ. पूजा परधी और डॉ. प्रशांत पुरकर उपस्थित रहे। चिकित्सकों ने कहा कि समय पर लिया गया टीकाकरण कई गंभीर बीमारियों और अस्पताल में भर्ती होने की नौबत को टाल सकता है।
इस विशेष क्लिनिक में न्यूमोकोकल वैक्सीन, इन्फ्लुएंजा (फ्लू) वैक्सीन, टीडीएपी (Tdap) बूस्टर, एचपीवी (HPV) वैक्सीन, शिंगल्स वैक्सीन और हेपेटाइटिस-बी वैक्सीन उपलब्ध कराई जा रही हैं। डॉक्टरों के अनुसार ये टीके न्यूमोनिया, फ्लू, टिटनेस, डिप्थीरिया, काली खांसी, गर्भाशय ग्रीवा कैंसर, शिंगल्स और हेपेटाइटिस-बी जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव में मदद करते हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि न्यूमोनिया जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव के लिए पहले पीसीवी-13 और पीसीवी-23 वैक्सीन अलग-अलग समय पर दी जाती थीं, लेकिन अब नई पीढ़ी की पीसीवी-20 (PCV-20) वैक्सीन अधिक व्यापक और लंबे समय तक सुरक्षा प्रदान करती है। इसी तरह फ्लू वायरस हर वर्ष अपना स्वरूप बदलता है, इसलिए इन्फ्लुएंजा का टीका हर साल, विशेषकर मानसून से पहले लगवाने की सलाह दी जाती है।
डॉक्टरों ने यह भी स्पष्ट किया कि टीडीएपी बूस्टर डोज प्रत्येक 10 वर्ष में एक बार लेना चाहिए, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण अधिकांश वयस्क इसे नजरअंदाज कर देते हैं। महिलाओं के लिए एचपीवी वैक्सीन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की रोकथाम में प्रभावी भूमिका निभाती है और 45 वर्ष की आयु तक दी जा सकती है।
इसके अलावा, 50 वर्ष से अधिक आयु के लोगों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले मरीजों के लिए शिंगल्स वैक्सीन की सिफारिश की जाती है। यह न केवल संक्रमण को रोकती है बल्कि नसों में लंबे समय तक रहने वाले दर्द जैसी जटिलताओं से भी बचाती है। वहीं स्वास्थ्यकर्मियों और पहले कभी टीकाकरण न कराने वाले लोगों के लिए हेपेटाइटिस-बी वैक्सीन भी आवश्यक मानी जाती है।
मेडिकवर हॉस्पिटल्स के महाराष्ट्र एवं कर्नाटक क्षेत्र के प्रादेशिक निदेशक नीरज लाल ने कहा कि यह क्लिनिक वयस्कों में टीकाकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उन्हें गंभीर संक्रमणों से सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वहीं नवी मुंबई केंद्र प्रमुख संदीप जोशी ने कहा कि आज स्वास्थ्य क्षेत्र का फोकस केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि बीमारियों की रोकथाम पर भी है। समय पर टीकाकरण से अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत, स्वास्थ्य खर्च और जटिलताओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 50 से 60 वर्ष से अधिक आयु के लोग और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे मरीज नियमित रूप से आवश्यक टीकाकरण करवाएं, तो संक्रमण से होने वाली गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और मृत्यु दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। ऐसे में नवी मुंबई में शुरू हुआ यह एडल्ट वैक्सीनेशन क्लिनिक न केवल एक चिकित्सा सुविधा है, बल्कि स्वस्थ और सुरक्षित समाज की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम भी है।
