नवी मुंबई।
देश को क्षयरोग मुक्त बनाने के लक्ष्य को साकार करने के लिए नवी मुंबई महानगरपालिका ने “टीबी मुक्त भारत” अभियान को बड़े स्तर पर तेज कर दिया है। विश्व क्षयरोग दिवस के अवसर पर 24 मार्च 2026 से शुरू किए गए 100 दिवसीय विशेष अभियान के तहत महानगरपालिका स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीबी मरीजों की पहचान, समय पर उपचार और जनजागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य समाज में छिपे हुए टीबी मरीजों को खोजकर उन्हें जल्द उपचार उपलब्ध कराना तथा टीबी से होने वाली मौतों को कम करना है।
Navi Mumbai Municipal Corporation के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अभियान के दौरान विशेष रूप से उन लोगों की जांच की जा रही है, जिनमें टीबी संक्रमण का खतरा अधिक माना जाता है। इनमें 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक, मधुमेह से पीड़ित मरीज, टीबी रोगियों के संपर्क में रहने वाले लोग, पहले टीबी का उपचार ले चुके मरीज और 18.5 से कम BMI वाले नागरिक शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इन जोखिम वाले समूहों में समय पर जांच बेहद जरूरी है, ताकि बीमारी को शुरुआती चरण में ही रोका जा सके।
अभियान के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में आयुष्मान आरोग्य शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इन शिविरों में छाती के एक्स-रे के माध्यम से टीबी की जांच की जा रही है। साथ ही मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कुष्ठरोग जैसी अन्य बीमारियों की भी मुफ्त जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा संदिग्ध मरीजों की त्वरित जांच और तत्काल निदान पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि मरीजों को जल्द से जल्द उपचार मिल सके।
महानगरपालिका प्रशासन ने बताया कि टीबी मरीजों को नियमित दवाइयों के साथ “निक्षय पोषण योजना” के तहत पोषण सहायता भी दी जा रही है। इसके अलावा स्कूलों, कॉलेजों और सामुदायिक स्तर पर जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से लोगों को टीबी के लक्षण, बचाव और उपचार की जानकारी दी जा रही है। निजी डॉक्टरों और स्वास्थ्य संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर अभियान को और प्रभावी बनाया जा रहा है।
प्रशासन के अनुसार 24 मार्च 2026 से अब तक नवी मुंबई क्षेत्र में कुल 79 आयुष्मान आरोग्य शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। इन शिविरों में अब तक 7,901 नागरिकों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया है। बड़ी संख्या में नागरिकों की जांच होने से संभावित टीबी मरीजों की जल्द पहचान संभव हो रही है और समय रहते उनका उपचार शुरू किया जा रहा है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि क्षयरोग पूरी तरह से ठीक होने वाली बीमारी है, लेकिन इसके लिए समय पर जांच और नियमित उपचार बेहद जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति को लगातार दो सप्ताह से अधिक खांसी, वजन कम होना, बुखार आना या रात में अत्यधिक पसीना आने जैसी समस्याएं हों, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करानी चाहिए।
महानगरपालिका आयुक्त की ओर से नागरिकों, स्वयंसेवी संस्थाओं, स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं और स्वास्थ्य कर्मचारियों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की गई है। प्रशासन का कहना है कि “टीबी मुक्त भारत” केवल सरकारी योजना नहीं बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा राष्ट्रीय आंदोलन है, जिसमें हर नागरिक की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है।
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे टीबी को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें और बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत जांच कराएं। प्रशासन को उम्मीद है कि सामूहिक प्रयासों और जनसहभागिता के जरिए आने वाले समय में नवी मुंबई को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल किया जा सकेगा।
