मुंबई: महानगर की विविधता और एकता की पहचान एक बार फिर सामने आ रही है। Annadhana Mariamma Temple में आयोजित होने वाले वार्षिक मंदिर उत्सव में इस बार भी आस्था और भाईचारे का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। 18 अप्रैल को सुबह 10 बजे से शुरू होने वाले इस भव्य आयोजन में करीब 100 श्रद्धालु त्रिशूल (अलागु) धारण कर लगभग 2 किलोमीटर लंबी पदयात्रा करेंगे।
यह पदयात्रा एंटॉप हिल सेक्टर 2 से शुरू होकर कोकरीआगर स्थित मंदिर तक जाएगी। हर साल की तरह इस बार भी श्रद्धालु कठिन तपस्या और अनुष्ठान के माध्यम से देवी के प्रति अपनी भक्ति प्रकट करेंगे।
इस आयोजन की सबसे खास और प्रेरणादायक बात है मुबारक नाम के एक मुस्लिम युवक की भागीदारी, जो पिछले 10 वर्षों से इस हिंदू धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा बन रहे हैं। इस साल वह 11वीं बार इस यात्रा में शामिल होंगे। मुबारक हर साल अपने मुंह में लगभग 18 फीट लंबा त्रिशूल (अलागु) धारण कर इस पदयात्रा को पूरा करते हैं, जो बेहद कठिन और साहसिक माना जाता है।
मुबारक का कहना है,
“अन्नधाना मारियम्मा ने मेरी हर मनोकामना पूरी की है। यह मेरे लिए सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि दिल से जुड़ी आस्था है। मैं हर साल पूरी श्रद्धा से यह अनुष्ठान करता हूं।”
उनकी यह आस्था और समर्पण न केवल धार्मिक सीमाओं को तोड़ता है, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे का मजबूत संदेश भी देता है। ऐसे समय में जब अक्सर धर्म के नाम पर विभाजन की बातें सामने आती हैं, मुबारक जैसे लोग समाज को जोड़ने का काम कर रहे हैं।
मंदिर समिति के अनुसार, इस आयोजन में हर धर्म और समुदाय के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। सुरक्षा और व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित और सुचारू रूप से अपनी आस्था व्यक्त कर सकें।
यह उत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि मुंबई की गंगा-जमुनी तहजीब और सांप्रदायिक सौहार्द की जीवंत मिसाल भी है।
